Thursday, 13 July 2017

गीतिका

गीतिका

( विजात छंद-1222 1222 समान्त-आई, पदांत-है )

घटा घनघोर छाई है
पिया की याद लाई  है
,
सखी झूले पड़े अँगना
सजन से अब जुदाई है
,
कहाँ हो  दूर तुम हमसे
यहाँ महफ़िल सजाई है
,
बिना तेरे  पिया अब तो
हमें  दुनिया न भाई है
,
मिला जब  प्यार जीवन मे
खुशी  भी संग  आई है

रेखा जोशी