Wednesday, 21 June 2017


है  होती  सास    बहू में   तकरार
फिर भी करती वह आपस मे प्यार
एक का बेटा तो दूसरी का पति
जुड़े जिससे उनके दिलों के तार

रेखा जोशी

Monday, 19 June 2017

पिता


दुनिया की भीड़ में भरे जाने कितने तक्षक
रक्षा करे हमारी हर मोड़ पर  पिता रक्षक
है सिखाता चलना हमे वह जीवन के पथ पर
जीवन की अनजानी राहें पिता मार्गदर्शक

रेखा जोशी

Saturday, 17 June 2017

पापा जैसा कोई नहीं ,पूर्वप्रकाशित रचना

अमृतसर के रेलवे स्टेशन पर गाड़ी से  उतरते ही मेरा दिल खुशियों से भर उठा  ,झट से ऑटो रिक्शा पकड़ मै अपने मायके पहुंच गई,अपने बुज़ुर्ग माँ और पापा को देखते ही न जाने क्यों मेरी आँखों से आंसू छलक आये , बचपन से ले कर अब तक मैने अपने पापा के घर में सदा सकारात्मक उर्जा को महसूस किया है ,घर के अन्दर कदम रखते ही मै शुरू हो गई ढेरों सवाल लिए ,कैसो हो?,आजकल नया क्या लिख रहे हो ?और भी न जाने क्या क्या ,माँ ने हंस कर कहा ,''थोड़ी देर बैठ कर साँस तो ले लो फिर बातें कर लेना ''| अपनी चार बहनों और एक भाई में से  मै सबसे बड़ी और सदा अपने पापा की लाडली बेटी रही हूँ ,शादी से पहले कालेज से आते ही घर में  जहाँ मेरे पापा होते थे मै वहीं पहुंच जाती थी और जब तक पूरे दिन का लेखा जोखा उन्हें बता नही देती थी तब तक मुझे चैन ही नही पड़ता था | मै और मेरे पापा न जाने कितने घंटे बातचीत करते हुए गुज़ार दिया करते थे ,समय का पता ही नहीं चलता था और मेरी यह आदत शादी के बाद भी वैसे ही बरकरार रही ,ससुराल से आते ही उनके पास बैठ जाती थी लेकिन मेरी मम्मी हमारी इस आदत से बहुत परेशान हो जाती थी ,वह बेचारी किचेन में व्यस्त रहती और मै उनके साथ घर के काम में  हाथ न बंटा कर अपने पापा के साथ गप्प लगाने में व्यस्त हो जाती थी ,लेकिन आज अपने पापा के बारे में लिखते हुए मुझे बहुत गर्व हो रहा है कि मै एक ऐसे व्यक्ति की बेटी हूँ जिसने जिंदगी की चुनौतियों को अपने आत्मविश्वास और मनोबल से परास्त कर सफलता की ओर अपने कदम बढ़ाते चले गए |

मात्र पांच वर्ष की आयु में उनके पिता का साया उनके सर के ऊपर से उठ गया था और मेरी दादी को अपने दूधमुहें बच्चे ,मेरे चाचा जी के  साथ अपने मायके जा कर जिंदगी की नईशुरुआत करनी पड़ी थी जहां उन्होंने अपनी अधूरी शिक्षा को पूरा कर एक विद्यालय प्रचार्या की नौकरी की थी और मेरे पापा अपने दादा जी की छत्रछाया में अपने गाँव जन्डियाला गुरु ,जो अमृतसर के पास है ,में रहने लगे | उस छोटे से गाँव की छोटी छोटी पगडण्डीयों पर शुरू हुआ उनकी जिंदगी का सफर ,मीलों चलते हुए उनकी सुबह शुरू होती थी ,वह इसलिए कि उनका स्कूल गाँव से काफी दूर था ,पढ़ने में वह सदा मेधावी छात्र रहे थे  और इस क्षेत्र में उनके मार्गदर्शक रहे उनके चाचाजी जी जो उस समय एक स्कूल में अध्यापक थे | दसवी कक्षा  से ले कर बी ए  की परीक्षा तक उनका नाम मेरिट लिस्ट में आता रहा था ,बी ए की परीक्षा में उन्होंने  पूरी पंजाब यूनिवर्सिटी में तृतीय स्थान प्राप्त कर अपने अपने गाँव का नाम रौशन किया था |धन के अभाव के कारण,पढ़ने के साथ साथ वह ट्यूशन भी किया करते थे ताकि मेरी दादी और चाचा जी की जिंदगी में कभी कोई मुश्किलें न आने पाए | दो वर्ष उन्होंने अमृतसर के हिन्दू कालेज में भौतिक विज्ञान की  प्रयोगशाला में सहायक के पद पर कार्य किया और आगे पढ़ाईज़ारी रखने के लिए धन इकट्ठा कर अपने एक प्राध्यापक प्रो आर के कपूर जी की मदद से आदरणीय श्री हरिवंशराय बच्चन के दुवारा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के भौतिकी विभाग में एम् एस सी पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया |अपने घर से दूर एम् एस सी की पढ़ाई उनके लिए एक कठिन चुनौती थी,यहाँ आ कर मेरे पापा का स्वास्थ्य बिगड़ गया ,किसी इन्फेक्शन के कारण वह ज्वर से पीड़ित रहने लगे और उप्पर से धन का आभाव तो सदा से रहता रहा था ,इसलिए यहाँ पर भी वह पढ़ने के साथ साथ ट्यूशन भी करते रहे जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ा ,जैसे तैसे कर के वह प्रथम वर्ष के पेपर दे कर वापिस अमृतसर आगये |इसी समय मेरी मम्मी इनकी जिंदगी सौभाग्य ले कर आई .मेरे  चाचा जी  बैंक में नौकरी लगने के कारण पापा घर परिवार कि ज़िम्मेदारी माँ पर छोड़ कर अपनी पढ़ाई का द्वितीय वर्ष पूरा करने वापिस इलाहाबाद चले गए,उसके बाद अमृतसर के हिन्दू कालेज में लेक्चरार के पद पर आसीत हुए ,उसी कालेज में हेड आफ फिजिक्स डिपार्टमेंट बने औऱ वाइस प्रिंसिपल के पद से रिटायर्ड हुए |उसके बाद वह लेखन कार्य से जुड़ गए ,हिंदी साहित्य में उनकी सदा से ही रूचि रही है ,उन्होंने श्रीमद्भागवत गीताका पद्धयानुवाद  किया,उनके दुवारा लिखी गई पुस्तके , मै तुम और वह ,तुम ही तुम ,आनंद धाम काफी प्रचलित हुई और उन्हें कई पुरुस्कारों से भी सम्मानित किया गया |

पापा हम सभी बहनों और भाई के गुरु ,पथप्रदर्शक और मित्र रहें है ,उन्ही की दी हुई शिक्षा ,प्रेरणा और संस्कार है जिसके चलते हम सभी ने नौकरी के साथ साथ बहुत सी उपल्ब्दियाँ भी हासिल की है |इस वृद्धावस्था में भी उनका मनोबल बहुत ऊंचा है ,आज भी अपने कार्य वह स्वयम करना पसंद करते है ,मेरी  ईश्वर  प्रार्थना है वह सदा स्वस्थ रहे और अपना लेखन कार्य करते रहे |

रेखा जोशी

सभी वो तोड़ बन्धन अब उड़े हैं आसमानों में
परिंदे कब रहा करते हैं हर दम आशियानों में
...
न रोको तुम न बांधों आज ज़ंजीरें यहाँ पर तुम
रहेंगे कब तलक छुप कर परिंदे इन मकानों में
....
कहीं तुम दूर उड़ जाना बसा लेना नया घर फिर
न रोकेंगे चले जाना नयें अपने ठिकानों में
....
न भरना आँख में आँसू न मुड़ कर देखना हम को
चले जाना यहाँ से दूर खोये तुम उड़ानों में
....
सदा तेरे लिये हमने खुदा से प्यार ही माँगा
करेंगे याद हम तुमको सदा अपने फसानों में

रेखा जोशी

महालक्ष्मी 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद
212 212 212

साथ तेरा मिला जो पिया
आज लागे नहीं  है जिया
पास  आओ  हमारे अभी
काश आ के न जाओ कभी
....
देख के रूप तेरा पिया
चाँद भी आज शर्मा गया
रात को रौशनी है मिली
मीत मै  संग तेरे चली
....
है ख़ुशी आज गाते  रहें
ज़िन्दगी जाम पीते रहें
प्रीत को  तोड़ जाना नही
छोड़ना साथ आता नही
,
बाग में अब कली है खिली
जिंदगी में   खुशी है  मिली
साथ  तेरा  हमें  जो  मिला
ज़िन्दगी से नही अब गिला
,
प्यार अब ज़िन्दगी से मिला
अब चलेगा यही सिलसिला
मीत  आये  यहां   ज़िन्दगी
गीत  गाये  यहां    ज़िन्दगी

रेखा जोशी

Friday, 16 June 2017

नाम ले कर पिया करते जाप


नाम ले कर पिया करते जाप
नही मिले फिर भी साजनआप
जब से गये तुम छोड़ कर हमें
जीवन हमारा बना अभिशाप

रेखा जोशी

Tuesday, 13 June 2017

दो मुक्तक

स्तुति

गौरीपुत्र  हे   विघ्नेश्वर   करें   तेरा ध्यान
विघ्नहर्ता   विघ्न   हरो   हम  तेरी सन्तान
स्तुति   वन्दन  कर शीश झुकाते   अपना
बुद्धि में आन विराजो मिले विद्या का ज्ञान
,
निन्दा

बुद्धि बल दिया सभी कुछ भगवान
न करना तुम   किसी  का अपमान
निन्दा किसी की कभी   न कीजिये
है  ईश्वर   की  हम  सभी   सन्तान

रेखा जोशी

Monday, 12 June 2017

झूमता सावन

चलती  ठंडी हवायें झूमता सावन आया
नभ गरजे  बदरा  बिजुरी लहराये
अब छाई हरियाली  मौसम है मन भाया
नाचे मोर आंगन में जियरा हर्षाये
झूला झूलती सखियाँ  गाती कोयलिया गीत
पिया गये परदेस  लागे नाहि जियरा
बरसा पानी नभ से पपीहा गुनगुनाया
आये याद प्रियतम है गोरी शर्माये

रेखा जोशी

रखें देश का मान है प्यारे


रखें देश का मान है प्यारे
दे कर अपनी जान है प्यारे

गोला बारूद आग है सब
मौत का सामान है प्यारे
,
है साया आतंक का छाया
दहशत में अब जान है प्यारे
,
घुस आये आतंकी शहर में
सड़कें अब सुनसान है प्यारे
,
देश की खातिर अब मर मिटना
होना अब कुर्बान है प्यारे

रेखा जोशी

छंद लौकिक अनाम


                           
छंद ..लौकिक अनाम मात्राभार २२ यति ११/११,मापनीमुक्त,पदान्त 2 गुरु
    
गीतिका..
 
छाई काली घटा,सखी सावन आया
झूमें मोरा जिया,गगन  बादल  छाया
,
बादल गरजे घनन ,जिया धड़के मोरा
भीगा तन मन आज , पिया बिना न भाया
,
हरियाली चहुँ ओर , हवा है मतवाली
अँगना नाचे  मोर, गीत कोयल गाया
,
झूला झूले आलि , खिली झूमती बगिया
सोंधी सोंधी  महक,फूल  उपवन हर्षाया
,
परदेस गये पिया, नही कुछ भी भाये
बिजुरी चमकी गगन ,ह्रदय है दहलाया

रेखा जोशी

Sunday, 11 June 2017

चमकते नयन तुम्हारे

कुछ खोजते देखते
जिज्ञासा से भरे
ढूंढ रहे कुछ
चमकते नयन तुम्हारे
,
अनगिनत ख्वाब
नैनों में सँजोये
पूरा होना चाह रहे
प्रफुल्लित उत्साहित
कुछ नवसृजन
करने को आतुर
चमकते नयन तुम्हारे
,
लड़कपन की चाह
कुछ कर गुजरने की
तमन्ना 
झलकती नैनों से
तुम्हारे
मन में है विश्वास
पूरे होंगे सपने
जो देख रहे
खुली आँखों से
चमकते नयन तुम्हारे

रेखा जोशी

बहाया क्यों खून गोली से यहाँ


न जाने तेरा है कौन सा ख्वाब
चाहिए बस चंद नोट और शराब
बहाया क्यों खून गोली से यहाँ
देना होगा तुम्हे इसका  जवाब

रेखा जोशी

Saturday, 10 June 2017

ग़ज़ल

212. 212. 212. 212

टूट कर दिल हमारा पिया रह गया
ज़िन्दगी का सजन फलसफा रह गया
,
रात भर देखते हम रहे ख्वाब ही
कब हुई सुबह बस देखता रह  गया
,
उम्र गुज़ारी सजन दर्द दिल मे लिए
अब यहाँ दर्द का सिलसिला रह गया
,
यूँ सताओ न तुम ज़िन्दगी अब हमें
तीर दिल मे हमारे चुभा रह गया
,
काश मिलती हमें ज़िंदगी में  खुशी
ज़िन्दगी से यही  इक गिला रह गया

रेखा जोशी

आधार छंद सुमेरु

आधार छंद - सुमेरु
मापनी - 1222 1222 122

समांत - आना <> पदांत - आ गया है

हमें भी मुस्कुराना आ गया है
पिया से दिल  लगाना आ गया है,
,
चली ठंडी हवायें अब यहाँ पर
हमें भी  गुनगुनाना आ गया है
,
मिले जो तुम मिला सारा जहाँ अब
यहाँ मौसम सुहाना आ गया है
,
खिला उपवन  यहां गाती फ़िज़ाये
बहारों का ज़माना आ गया है
,
बंधी  है प्रीत की यह आज डोरी
उन्हें अपना बनाना आ गया है

रेखा जोशी

Friday, 9 June 2017

धरतीपुत्र

धरा  से    सोना उगाता
है   धरतीपुत्र   कहलाता
भर कर सबका पेट कृषक
वह खुद भूखा सो जाता

रेखा जोशी

नदी नाले रहें है सूख सूखा है यहाँ हर वन

1222  1222  1222. 1222

नदी नाले रहे है सूख सूखा है यहाँ हर वन
सरोवर  ताल सूखे तड़पता है अब यहाँ जन जन
धरा सूखी यहाँ पौधे रहे है सूख बिन पानी
हमें है  आस घिर घिर आज  बरसेगा यहाँ सावन

रेखा जोशी

Thursday, 8 June 2017

जब रात में सिमट जाता उजाला सजन

जब  रात में सिमट जाता उजाला सजन
सुबह लाती फिर खुशियों की माला सजन
,
देख   तेरे   नैन  हम  देखते  रह गये
भूल गये फिर सदा  मधुशाला  सजन
,
हर कर्म हम करेंगे साजन साथ साथ
रंग में अपने हमें  रंग डाला सजन
,
सुन्दर सलोना  बनायेंगे घर अपना
संग संग खायेंगे फिर निवाला सजन
,
साथी हाथ बढ़ा कर देना साथ सदा
संग जो तुम हो बना घर शिवाला सजन

रेखा जोशी

प्यार में हमको सजन बहकाने लगे

प्यार में  हमको  सजन  बहकाने लगे
जख्म हम को मिले वोह छिपाने लगे
,
जो  देता  हमे सहारा   मुश्किलों   में
उस सफीने को फिर क्यूँ  डुबाने लगे
,
उनके आने की खबर  सुनते ही हम
फूल राह में सजन  हम बिछाने लगे
,
जीने की तमन्ना नही बिन तेरे पिया
मौत का सामान हम  अब सजाने लगे
,
भूल जायें तुम्हे दम नही है इतना
पर याद तेरी दिल से मिटाने लगे
,
रेखा जोशी

Wednesday, 7 June 2017

है   प्रेम में  श्याम  के  डूबी   राधिका
मुरली की तान सुन झूम उठी राधिका
कान्हा  समाया  राधा  के   अंग अंग
रंग  के कृष्णा  के रंग   गई  राधिका

रेखा जोशी 

Tuesday, 6 June 2017

पुकारो ज़िन्दगी जी लो यहाँ हर पल

मुक्तक

सजन तेरी हमे जब याद आती है 
ख़ुशी रह रह सनम तब गीत गाती है 
पुकारे ज़िंदगी जी लो यहाँ हर पल 
सजन अब  ज़िंदगी भी मुस्कुराती है

रेखा जोशी

बेवफा सजन से प्यार क्या करना


बेवफा  सजन से प्यार क्या करना
दर्द ए  गम का इकरार क्या करना
है  रूठी   हमसे   तकदीर  अपनी
टूटे  दिल  का इज़हार क्या करना

रेखा जोशी

है मीत बहुत मिले हमे इस अजीब ओ गरीब दुनिया में

है  मीत बहुत मिले हमें  इस अजीब ओ गरीब दुनिया में
मिला  न हमे   ऐसा  कोई  बने  मेरा  नसीब   दुनिया मे
आज से ,अब से,अभी अभी से,मुझे  तुम्हारा प्यार कबूल
तेरे  सिवा कोई  भी न आया दिल  के करीब  दुनिया में

रेखा जोशी

Saturday, 3 June 2017

वक्त  की धारा  में सदा  बहता जीवन
कहीं दुख के सागर  में  डूबता जीवन
आओ जियें हर ऋतू हर मौसम हम यहाँ
कहीं गागर ख़ुशी से यह भरता जीवन
,
है  शतरंज  की  बिसात  पर  टिकी यह ज़िन्दगी
सोच समझ चलना घात पर टिकी  यह  ज़िन्दगी
न   जाने  कब  चल  दे   कोई    टेढ़ी  चाल  यहां
हमारी शह और  मात पर   टिकी  यह  ज़िन्दगी

रेखा जोशी

Friday, 2 June 2017

न करना कभी अभिमान से तुम प्यार
अपने जीवन  को तुम  लो अब सँवार
तर   जायेगा   इस   जग  से  तू  बन्दे
काम  क्रोध  मद  लोभ का कर संहार

रेखा जोशी

तुमसे  मिले  प्रियतम  हमे जमाना हो गया
प्यार हमारा अब सजन अफसाना हो गया
क्यों अकेले  गये   छोड़   हमें परदेश पिया
रोका  दिल को  कमबख्त दीवाना हो गया

रेखा जोशी

Thursday, 1 June 2017

सुहाना मौसम औऱ नदी का किनारा

सुहाना   मौसम और नदी का किनारा
बहारों   ने   पिया   नाम   तेरा पुकारा
आंखों से हमारी प्यार पढ़ लो  साजन
शायद मिले न फिर यह मौका दोबारा

रेखा जोशी

कैसे जियेंगे मिलकर जहाँ में हंसते हुए

कैसे  जियेंगे  मिलकर जहाँ  में हँसते हुए
टूट जायेंगे  हम  ज़िन्दगी  यह  सहते हुए
बीत जायेगी यह ज़िन्दगी हमारी इक दिन
कभी  दुआ तो कभी बद्दुआ से लड़ते हुए

रेखा जोशी

मुक्तक

है  शतरंज  की  बिसात  पर  टिकी यह ज़िन्दगी
सोच समझ चलना घात पर टिकी  यह  ज़िन्दगी
न   जाने  कब  चल  दे   कोई    टेढ़ी  चाल  यहां
हमारी शह और  मात पर   टिकी  यह  ज़िन्दगी

रेखा जोशी