Friday, 29 August 2014

समायें तुझ में हम जैसे जलधार सागर में

जैसे मिले जल नदिया का आपार  सागर में 
खो देता मिल कर नीर भी आकार  सागर में 
एकरस हो  जायें हम भी मिले जब ईश तुमसे 
समायें  तुझ में हम जैसे जलधार  सागर  में 

रेखा जोशी 

Thursday, 28 August 2014

क्षणिकाएँ

क्षणिकाएँ 

ओ पंछी छोड़ पिंजरा 
भर ले उड़ान 
नील गगन में 
सांस ले तू
उन्मुक्त खुली हवा में 
तोड़ बंधन 
फैला कर पँख 
ज़मीं से अम्बर 
छू लेना तुम 
अनछुई ऊँचाईयाँ
………………
2
बहता पानी नदिया का 
चलना नाम जीवन का 
बहता चल धारा संग  
तुम में रवानी
है हवा सी 
खिल उठें  वन उपवन 
महकने लगी बगिया 
रुकना नही चलता चल 
................ 
3
खिलती है 
कलियाँ 
महकती है 
बगिया 
बिखरती रहे 
महक 
दोस्ती की 
बनी रहे दोस्ती 
हमारी सदा 

रेखा जोशी 

Wednesday, 27 August 2014

सजन फ़रयाद अब सुन लो हमारी तुम जहाँ भी हो


कहाँ हो अब  पुकारे हम सदा तुम को यहाँ जानम 
बिना  तेरे  ज़माने   में  अकेले  हम  यहाँ   बालम 
सजन फ़रयाद अब सुन लो हमारी तुम जहाँ भी हो 
बदल दो तुम सनम आ कर हमारे घर यहाँ आलम 

रेखा जोशी 


लगता है हर पल कहीं छूट सा रहा जैसे

न  जाने  क्यों  बेचैन  आज मन  मेरा  ऐसे 
यूँ  तो  किसी  से कोई  गिला न शिकवा  वैसे 
न जाने यह कैसी  तड़प है आज इस दिल में
लगता  है  हर  पल  कहीं  छूट  सा रहा  जैसे 

रेखा जोशी 

मेरा अंगना [शीर्षक]


आज शानो अपने परिवार के साथ बहुत खुश थी ,महक रहा था उसका छोटा सा अंगना और उसे सुगन्धित किया था उसकी बेटियों ने , कुसुम और सुमन जो हर मुश्किल घड़ी में अपनी माँ के अंग संग खड़ी रहती थी lजिस दिन शानो ने अपने आलसी ,निकम्मे और शराबी पति को घर से बाहर का रास्ता दिखाया था ,कितनी टूट चुकी थी वह तब ,उस काली रात की यादें आज भी उतनी ही भयानक और दिल को दहला देने वाली थी, वह यह कैसे सहन कर सकती थी कि अपनी खून पसीने की कमाई जो उसने लोगों के घरों में झाडू पोंछा कर के इक्ट्ठी की थी उसका निक्कमा पति उसे पानी की तरह शराब पी कर बहा दे ,कितने सपने संजोये थे उसने जब उसकी शादी हुई थी ,एक तो गरीब परिवार में पली और बड़ी हुई थी वह ,उपर से सौतेली माँ में ताने और कडवी बाते जले पर नमक छिडकने का काम किया करती थी ,बाप ने भी उसकी छोटी उम्र में ही शादी कर अपना पीछा छुडवा लिया था l ऐसे में रामू को अपना पति पा कर वह बहुत खुश थी ,वह अपने सुहाने सपनो को हकीकत में बदलते हुए देखना चाहती थी लेकिन जल्दी ही रामू की असलियत खुल गई ,आलस का मारा रामू सारा सारा दिन चारपाई तोड़ने के सिवा कुछ नही करता था और शाम होते ही अपने जैसे आवारा दोस्तों के साथ पी कर अपना दिल बहला लिया करता था ,इसी बीच उसकी कोख में कुसुम आ गई थी lक्या करती बेचारी शानो ,हार कर घर की दहलीज लांघ कर गैरो के घर झाड़ू पोछे का काम करने लगी ,अपने लिए नही बल्कि अपनी उस नन्ही सी जान के लिए जो उसके पेट में पल रही थी l

शानो ने रामू को समझाने की बहुत कोशिश की ,वह अपनी जिम्मेदारियों की समझे और उन्हें निभाए लेकिन रामू को तो आराम से सब कुछ मिल जाता था ,रात को पीता और दिन को सोया रहता l धीरे धीरे रामू पीने के लिए शानो से पैसे लेने लगा ,कभी प्यार से तो कभी डांट डपट कर ,कभी कभी तो उस पर हाथ भी उठा देता था lसाल पर साल बीतते गए और कुसुम के बाद सुमन ,अजय ,विजय और महक उसके अंगना में खेलने लगी ,हर वर्ष एक के बाद एक बच्चा आता गया ,कई बार तो उसे अपने पेट सफाई भी करवानी पड़ी ,वह तन और मन से बहुत कमज़ोर हो गई थी ,लेकिन रामू को इससे कोई मतलब नही था वह तो बस अपने में ही मस्त था ,शानो के कमाए हुए पैसे पर वह अपना अधिकार समझता था , शानो के मना करने पर लात घूसों से पिटाई कर उसे अधमरा कर देता था ,छीन कर ले जाता था उससे वो पैसे जिससे वह अपने बच्चों का पेट भरती थी ,शानो का खून खौल उठता जब रामू उसकी मेहनत की कमाई छीन कर शराब में बहा देता था ,बच्चे भी बड़े हो गए थे पर बेचारे चुपचाप डर के मारे एक कोने में दुबक जाते थे l

उस भयानक रात में भी यही सब कुछ हुआ था ,रामू ने अपनी पूरी ताकत से उसकी पिटाई की थी ,मार मार कर उसे अधमरा कर दिया था पर पता नही शानो में इतनी शक्ति कहाँ से आ गई थी ,इतनी मार खाने के बाद भी उसने रामू को पैसे नही दिए और चीखती हुई घर छोड़ कर भाग खड़ी हुई ,भागते भागते वह सीधे अपनी मैडम जी के घर पहुंच गई थी lउसे इस हालत में देख उसकी मैडम जी जो एक टीचर थी हैरान हो गई ,शानो ने उनके पाँव पकड़ कर आप बीती सुना कर उनसे मदद मांगी थी lउसकी मैडमजी ने तुरंत पुलिस को फोंन लगा कर डोमेस्टिक वोईलेन्स के अंतर्गत मामला दर्ज़ करवा कर रामू को सजा दिलवाई थी और सदा के लिए उसे घर से बाहर करवा दिया था lतब से आज तक शानो ने रामू का मुहं तक नही देखा था l यह सब सोचते हुए शानो की आँखे भर आई ,अगर उस रात शानो कमज़ोर पड़ गई होती और घर से न भागी होती तो आज भी सब कुछ वैसे ही चल रहा होता,वैसे ही रोज़ रोज़ रामू की मार , वही गरीबी, उसे रामू के चले जाने का कोई दुःख नही था पर न जाने उसका ख्याल आते ही आज भी उसका मन भारी हो जाता था ,लेकिन वह खुश थी ,उसकी मैडम जी ने कुसुम को सिलाई कढाई का प्रशिक्षण दिलवाया और सुमन को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग दिलवाई ,आज शानो का अंगना किसी स्वर्ग से कम नही था ,उसकी बिटिया महक और दोनों बेटे अजय ,विजय स्कूल में शिक्षा ले रहे है l आज उसके बच्चों ने उज्ज्वल भविष्य की ओर अपने कदम बढ़ा लिए थे

Tuesday, 26 August 2014

वीरान है यह दिल बिन तुम्हारे


पतझड़ सा
वीरान है यह दिल 
बिन तुम्हारे
है मालूम 
नही आओ गे तुम 
न जाने  इंतज़ार 
फिर भी क्यों 
हमे है तुम्हारा
सुन रही तड़प मेरी
यह उदास शाम
शांत  सागर
लेकिन
संग मेरे
ले रहा  सिसकियाँ
यह सारे नज़ारे
पुकार  रहे  तुम्हे 
गुम है यह दिल 
जुस्तजू में तेरी 
और 
तलाश रही तुम्हे
मेरी नम आँखे

रेखा जोशी 

खुश थे हम जीवन में अकेले ही


तोड़ कर दिल हमारा गया कोई 
आस जीने की मिटा  गया कोई 
खुश थे हम जीवन में अकेले ही 
अरमान दिल के जगा गया कोई 

रेखा जोशी 

Monday, 25 August 2014

दर्द ए गम ही मिला सदा प्यार में हमें

गीतिका 

 तुम्हे देख सनम गुज़र जाते है पल 
बातों  बातों में गुज़र जाते है पल 

तुम तो न आये इधर  यादें है पास 
तेरी यादों  में   गुज़र जाते है पल 

गा रहे  गीत गुज़रे उधर  हसीं लम्हे 
गुनगुनाते उन्हें  गुज़र जाते है पल 

दर्द ए गम ही मिला अब प्यार में हमें 
 दर्द के सहारे गुज़र जाते है पल 

भटक रहे ना जाने क्यों हसीं लम्हों में
महक रहे लम्हों में गुज़र जातें है पल 

रेखा जोशी 

Sunday, 24 August 2014

चर्चा करें किस बात की इस झूठिस्तान से

सीमा   पर  चलती गोलियां पाकिस्तान से
झूठे   वायदे   किये  इसने  हिन्दुस्तान  से
कैसे   करें   विश्वास   घोंपे   पीठ  पर  छुरा
चर्चा करें किस बात की इस  झूठिस्तान  से

रेखा जोशी 

Saturday, 23 August 2014

श्याम तुम्हारे रंग में रंगी गोकुल की गोपियाँ

बन   सारथी  पार्थ का गीता  का  पाठ  पढ़ाया  था
बन  कर  राधा  के   साँवरे  प्रेमरस  छलकाया  था   
श्याम   तुम्हारे  रंग में  रंगी  गोकुल  की  गोपियाँ 
चकाचौंध अर्जुन हुआ जब विराट रूप दिखलाया था 

रेखा जोशी 

Thursday, 21 August 2014

मुस्कुराते सदा रहो साजन


प्यार  तुम्हे  सदा  रहे  मिलता 
ज़िन्दगी  में सदा  रहे  खिलता 
मुस्कुराते   सदा  रहो   साजन 
सिलसिला प्यार का रहे चलता 

रेखा जोशी 



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Tuesday, 19 August 2014

ओ साथी मेरे थम गया वक्त

तस्वीर से 
निकल कर 
आ जाओ अब
राह तुम्हारी न जाने 
कब से निहार रहे
लम्हा लम्हा
खोये है हम
सुहानी यादों में तुम्हारी   
बुन रहे हम 
सपने सुहाने 
ओ साथी मेरे 
थम गया वक्त 
नही हो रही 
खत्म अब 
घड़ियाँ इंतज़ार की 

रेखा जोशी 

भर लेंगे हम अब उड़ान आसमान पर

आज अपनी खुद से पहचान हो गई है
मुश्किलें अपनी अब आसान हो गई है
भर लेंगे हम अब उड़ान आसमान पर 
ज़िंदगी  हम  पर  मेहरबान  हो  गई है

रेखा जोशी 

Monday, 18 August 2014

कैसे प्रभाषित करूँ प्रेम अपना

कैसे प्रभाषित करूँ 
प्रेम अपना 
नही तोड़ सकता 
आसमान के तारे 
न ही पास अपने 
अम्बार दौलत के 
देखता हूँ जब भी 
तुम्हे मुस्कुराते 
खिल उठता दिल मेरा 
तड़प  उठता मन मेरा 
देख नम आँखे तेरी 
तुम्हारा
हॅंसना  खिलखिलाना 
महका देता अँगना मेरा 
गुलाब की 
खुश्बू से जिसके 
है भर जाता 
अंग अंग मेरा 
लेकिन रहती 
ज़ुबान 
खामोश मेरी 
तुम ही बताओ 
कैसे प्रभाषित करूँ 
प्रेम अपना 

रेखा जोशी 

किशोरावस्था का प्यार


सावन के अंधे को जैसे सब ओर हरा ही हरा दिखाई देता है वैसे ही जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते ही नवयुवक और नवयुवतियाँ दोनों के बीच एक दूसरे के प्रति आकर्षण इस कदर हावी हो जाता है कि जैसे सिवा उनकी मुहब्बत के इस दुनिया में और कुछ है ही नही, अपने आप को लैला मजनू ,रोमियो जुलीयट से कम नही समझते यह लोग |यही हाल था सोनू और अंशु का ,रात दिन एक दूसरे के ख्यालों में खोये हुए ,जैसे सारी की सारी दुनिया उन दोनों के बीच में ही सिमट कर रह गई हो ,कितनी विचित्र बात है माँ बाप ,भाई ,बहन और सारे रिश्ते नाते सभी पराये हो जाते है जब मुहब्बत के आईने में पागल प्रेमी देखने लगते है तब अपने प्रियतम के सिवा उन्हें और कुछ दिखाई ही नही देता |

, यह उम्र ही ऐसी है, किशोरावस्था का प्यार ,उस समय वह अपने शारीरिक और मानसिक विकास का आपस में सामंजस्य को तो स्थापित कर नही पाते लेकिन प्यार मुहब्बत की रंगीन दुनिया उनकी आँखों में बखूबी बस जाती है |जब अंशु की माँ ने उसे उसके कच्ची उम्र के प्यार के बारे में समझाना चाहा तो उसे अपनी माँ भी दुश्मन नजर आने लगी जो जिंदगी में उसकी खुशियाँ चाहती ही नही ,यह सोच ,भावना में बह कर बरबस अंशु की आँखों में आंसू आ गए ,उसने तो मन में पक्का निश्चय कर लिया कि अब चाहे कुछ भी हो वह शादी करेगी तो सिर्फ सोनू से ,अगर माँ बाप नही मानते तो वह सोनू के साथ भाग कर शादी कर लेगी ,जो भी अंजाम होगा देखा जायेया गा | 

अंशु के मम्मी पापा ने अपनी रजामंदी दे कर अपनी बच्ची की जिद और प्यार के आगे घुटने टेक दिए लेकिन जिस गाँव में वो रहते थे वहां की पंचायत ही इस रिश्ते के खिलाफ थी,उन दोनों का एक ही गोत्र का होना उनकी शादी में अड़चन पैदा कर रहा था जो सबकी परेशानी का सबब बन चुका था |न जाने कितने ही मासूम बच्चों ने जात पात ,खाप पंचायतों ,माँ बाप व् अन्य रिश्तेदारों की रजामंदी न मिलने के कारण मुहब्बत के आईने में इक दूजे को देखते हुए इस दुनिया से सदा के लिए विदा ले ली,यह सोच सोच कर अंशु के घरवाले बहुत परेशान थे,उसके माँ बाप बहुत दुविधा में पड़ गए ,इधर कुआं तो उधर खाई ,उन्होंने अंशु के बालिग़ होने तक इंतज़ार किया और फिर पुलिस प्रोटेक्शन ले कर उन दोनों की शादी कर दी | 

सोनू और अंशु एक दूसरे को पा कर फूले नही समा रहे थे लेकिन अभी भी उन के सिर पर पंचायत की तलवार तो टंगी हुई थी जो इस शादी का लगातार विरोध कर रही थी |किशोरावस्था के इस प्यार के कारण अनगिनत जिन्दगियां बर्बाद हो चुकी है और कई बर्बाद हो रहीं है ,कई नाबालिग लडकियाँ गलत हाथों में पड़ कर अपना जीवन तबाह कर बैठती है ,ऐसे लोगों की कमी नही जो प्यार भरी मीठी मीठी बातें कर इन बच्चियों को बहला फुसला कर शादी का वादा कर के याँ झूठ मूठ की शादी रचा कर उन्हें आगे बेच देते है याँ उन्हें नाजायज़ धंधा करने पर मजबूर कर देतें है |

|माँ बाप के लिए भी यह समय किसी परीक्षा से कम नही होता जो सदा अपने बच्चों का हित ही चाहतें है वह कैसे उन्हें गलत रास्ते पर चलने दे सकते है और बच्चे अपने बड़े बूढों की बातों को अनसुना कर अपनी मनमानी करना चाहते है ,वह इसलिए कि हम माँ बाप उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल कर अपनी बात मनवाना चाहते है | अपने बच्चों के किशोरावस्था में कदम रखते ही अगर माता पिता उन्हें अपने विशवास में ले कर उनके साथ मित्रतापूर्वक व्यवहार से उनकी हर अच्छी बुरी बात को समझने कोशिश करें और उनकी भावनाओं को समझ कर हर छोटी बड़ी बात को उनके साथ बांटना शुरू कर दें ,उनके दोस्तों और सहपाठियों को भी अपने बच्चों जैसा समझ कर समय समय पर उनके विचारों की भी जानकारी लेते रहें तो इसमें कोई दो राय नही होगी कि उनके बच्चे जिंदगी में कुछ भी करने से पहले एक बार अवश्य ही उनकी बताई हुई बातों को सोचे गे यां यह भी हो सकता है कि वह उनके बताये हुए रास्ते पर ही चलें ,अगर मान लो वह किसी के साथ प्रेम प्रसंग बढायें गे भी तो मुहब्बत के आईने में एक परिपक्व प्रेम ही उभर कर आये गा |

रेखा जोशी 

अधर बँसी पीताम्बर सोहे माथे पे मोर मुकुट

दिल चुराया राधिका का गोकुल के नन्दकिशोर ने 
रास  रचाये  गोपियों  संग  गोकुल  के चितचोर ने 
अधर  बँसी   पीताम्बर  सोहे  माथे  पे  मोर मुकुट 
गोपियों का मन  लुभाया गोकुल के  माखनचोर ने

रेखा जोशी 

Sunday, 17 August 2014

सभी मित्रों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई

सभी मित्रों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई

देवकीनंदन  कृष्ण कन्हैया सभी  का प्यारा 
राधिका का मनमोहना गोपियों का भी दुलारा 
नाम तेरा ले कर पिया मीरा ने विष का प्याला 
नटखट मनमोहना यशोदा  की आँखों का तारा

रेखा जोशी 

Saturday, 16 August 2014

धड़कता दिल कांपते हाथ

काली अँधेरी रात
छूटा साये  का भी साथ
धड़कता दिल कांपते हाथ

लगता क्यों
 न जाने
कोई है मेरे साथ
चल रहा संग मेरे
जगाता दिल में मेरे
इक आस
रख कर हिम्मत
बढ़ता चल न डर
झाँक दिल में अपने
थरथराती लौ दिये की
दिखा रही राह
स्याह अँधेरे में
लेकिन
फिर भी रहा मेरा
धड़कता दिल कांपते हाथ

भीतर ही भीतर
हो रही उजागर
राह मंज़िल की
थामे अपनी साँसे
नहीं दी बुझने
वह थरथराती लौ
रखती रही पग अपने
संभल संभल कर
लेकिन
फिर भी रहा मेरा
धड़कता दिल कांपते हाथ

रेखा जोशी 

इक पंछी अकेला चला जा रहा

ढल गई शाम
अँधेरे के मुख में
जा रहा सूरज
छूट रहे सब साथी
सूनी डगर
तोड़ सभी रिश्ते नाते
छोड़ मोह माया के
बंधन
इक पंछी अकेला
दूर जा रहा
अँधेरा शाम का
अब
बढ़ा जा रहा

रेखा जोशी

Friday, 15 August 2014

मंजिलें मिलें गी आगे बहुत

माना गम की रात लम्बी है सो जा तू चादर को तान l 
उषा किरण सुबह को जब आए बदल जाये समय की धार l l 
थक कर कहीं तुम रुक न जाना न समझना जीवन को भार l 
मंजिलें मिलें गी आगे बहुत मिले गी तुम को नयी राह l l 

रेखा जोशी 

महक उठी आज तमन्नाऐं दिल की


महक उठी आज तमन्नाऐं दिल की 
गुजरे हो जब से  इन गलियों से तुम 
..............................................
खिल उठे तन्हाई के हसीन लम्हे 
यादों में हमारी जब गुजरते  तुम 
बहारे सकून की छा जाती हर ओर 
ख्यालों में हमारे जब आते हो तुम 
............................................
खिल उठती है बगिया मेरे दिल की 
जब गुनगुनाती मै तुम्हारे वह गीत 
सहेज रखी है अब तलक वही यादे
समाये हो जिसमे सिर्फ तुम ही तुम 
...............................................
महक उठी आज तमन्नाऐं दिल की 
गुजरे हो जब से  इन गलियों से तुम 

रेखा जोशी 

Thursday, 14 August 2014

अब यह दर्द सहा जाता नहीं

क्या कहें कुछ  कहा जाता नहीं
बिन कहे अब  रहा  जाता नहीं

गम तो बहुत है  इस जीवन में
गम और अब  सहा जाता  नहीं

मिले गम बहुत अपनों  से हमें
गैर  से कुछ  कहा  जाता  नही

बहुत बहाये आँसू अब मगर
रोया  अब  हमसे  जाता  नहीं

माना की  दर्द यह हसीन  है
अब यह दर्द  सहा जाता नहीं

रेखा जोशी




स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

जान हथेली पर लिये, करे वतन से प्यार । 

अपने भारत के लिये  ,मरने को तैयार ।। 
.................................................. 

घायल हुआ  सेनानी  ,कभी न मानी  हार 

सीमा पर बहता लहू, दिया जान को वार ।। 

 रेखा जोशी 

Wednesday, 13 August 2014

शत शत नमन करें देश पे मिटने वालों को

करें हिफाज़त वतन की उन वीर जवानो को 
जो अमर हुए  सरहद पर देश के शहीदो को 
तिरंगे  की  आन बान और शान की खातिर 
शत शत  नमन करें देश  पे मिटने वालों को 

रेखा जोशी 

कैसे लिखूँ मै यह दर्द भरी दास्तान

अब क्या लिखूँ
कैसे लिखूँ मै
यह दर्द भरी
दास्तान

सोच रही मै
पकड़ हाथ में कलम
भावनाएं शून्य हुई
शब्द कहीं खो गए
मन हुआ बोझिल
हूँ तड़प रही
कहीं भीतर से
जल बिन मछली की तरह
छटपटा रही
कैसे लिखूँ मै
यह दर्द भरी
दास्तान

यहाँ चल रही
यह कैसी हवा
झुलस रही परियाँ
हर रोज़ यहाँ
दरिंदगी की आग में
तोड़ रही दम यहाँ
पंगु हुआ कानून
खामोश न्याय
कैसे लिखूँ मै
यह दर्द भरी
दास्तान

रेखा जोशी 

Tuesday, 12 August 2014

धुंधला आईना

कहते है कि आईना कभी झूठ नहीं बोलता,आईने की इसी खूबी के कारण , बेचारी नन्ही सी राजकुमारी स्नो वाईट को ,अपनी सौतेली माँ के ज़ुल्मों का शिकार होना पड़ा| जितनी बार उसकी माँ आईने से पूछती ,''आईने, आईने बता सबसे सुंदर कौन ,' आईना बेचारा कैसे झूठ बोलता ,वो हर बार यही कहता ,''स्नो वाईट और उसकी माँ के गुस्से का पहाड़ टूट पड़ता उस नन्ही सी जान पर | शुक्र है कि उसे सात बौने मिल गए ,जिन्होंने उसकी दुष्ट माँ से उसकी रक्षा की,वरना वह उसे मरवा ही देती |स्नो वाईट को तो बौनों ने बचा लिया ,मगर आईना बेचारा परेशान और दुखी हो गया कि उसके कारण प्यारी सी स्नो वाईट को कैसे कैसे दुःख और मुसीबतें झेलनी पड़ी ,वो कुछ कुछ सावधान हो गया,
जब विभिन्न विभिन्न मुखौटे ओढ़े तरह तरह के लोग उसके सामने आते तो वह थोडा धुंधला जाता और उन लोगों की असलियत को छिपा जाता | झूठ की चादर लपेटे लोग भी सत्यवादी कहलाने लगे |धोखेबाज़ दुष्ट और फरेबी लोगो का बोलबाला होने लगा क्यों कि आईने ने अब सच का दामन छोड़ दिया था |मेरी तरह के गिने चुने लोग चिल्ला चिल्ला कर कहते ,'आईना झूठ बोलता है ,आईना झूठ बोलता है '',लेकिन सब बेकार ,आईना तो सबूत था उनकी सच्चाई का |
अभी हाल ही में मेरी मुलाकात हुई ,ऐसे ही एक करोडपति सज्जन पुरुष से ,जो एक लम्बी बीमारी से उठे थे ,वो जब भी मिलते ,यही कहते ,'',मैने मौत को बहुत करीब से देखा है ,अस्पताल में सारा दिन बिस्तर पर पड़ा पड़ा यही सोचा करता था ,कि मेरे जैसा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं ,जो मै पैसे का घमंड करता रहा ,आज मेरे पास इतनी दौलत होने पर भी मै अपने को नहीं बचा पाया तो क्या फायदा'',और वो खूब धर्म करम की बाते किया करते |मै भी उनकी बातो में आ गयी ,सोचा शायद बीमारी में आईने ने इन्हें इनका असली चेहरा दिखा दिया हो ,चलो देर आये दुरुस्त आये ,वह किसी आश्रम में भी जाने लगे |एक दिन वो फिर मुझे मिले ,जनाब नई औडी गाडी में सवार थे ,वही पुराने रंग ढंग ,वही पैसे का गरूर |इंसान की फितरत को इतनी जल्दी रंग बदलते देख मै दंग रह गयी | ओफ हो, अब समझी उनके पैसे के गरूर और घमंड से आईना फिर से धुंधला पड़ गया,वह उन सज्जन को वही दिखाने लगा जो वह देखना चाहते थे |, अब आप लोग भी सावधान हो जाइए ,आगे से जब भी आप आईने में देखे तो ,उसे पहले साफ़ कपड़े से जरूर पोंछ लीजिये ताकि आईना झूठ न बोल सके |

 रेखा जोशी 

Monday, 11 August 2014

स्वतंत्रता दिवस पर


 वीर आल्हा छंद 

लुटती इज़्ज़त माँ बहनो की ,रोती  है  बालायें  आज । 
 आज पुकारे  भारत माता ,लाल बचा लो मेरी लाज ॥ 

टूट गई  डोर विश्वास की ,मिट गया अब दीन ईमान । 
जननी  रोय आँसू बहाये   ,अब माँ बाप का हो सम्मान ॥ 

जागो माँ के वीर सपूतो ,डूब रहा है भारत आज । 
इसे लूटते तेरे भाई ,क्यों न गिरायें उन पर गाज ॥ 

धधक रही लालच की ज्वाला ,पनप रहा है  भ्रष्टाचार।
है नोच रहे कपूत माँ के ,बंद करें  अब  अत्याचार ॥ 

रेखा जोशी 

मान और शान तिरंगे की रखने को तैयार है

जननी जन्म भूमि पर वह मर मिटने को तैयार हैं 
भारत  माता  की  खातिर   सर   कटने  को तैयार है 
परिवार  अपने  से  मीलों   दूर  तैनात   सीमा   पर 
मान  और  शान   तिरंगे   की   रखने   को  तैयार है 

रेखा जोशी

Sunday, 10 August 2014

Create your own future.

We live in present. Past is gone in the world of dreams and our dreams to be fulfilled lies in the lap of future. Our brain is always thinking one or the other thing when we are awake and in the state of sleep it takes us to the world of dreams. As said by the psychologists dreams are nothing but our unfulfilled desires and that to in abstract and complex form. It is observed by many of us that there are some significant dreams which have a great impact on our lives. The formula of benzene was seen by a scientist kekuly in the form of a hexagon ring of six snakes with tail of one in the mouth another in his dream. There are a number of examples where the dreams of many persons came true Is it the power of human brain to peep into the future? It is a known fact that our brain emits waves which can be measured by an instrument and the mapping of such waves is known as EEG which measures the frequency of brain waves. For the normal functioning of brain the frequency of waves is fourteen cycles per seconds which is reduced to seven cycles per second when we are asleep, the state of brain when we dream, where the rapid eye movement takes place. The deeper we are in sleep, the lesser is the frequency and the more relaxed a person is. The most important phase is that where the rapid eye movement takes place. It is observed that by meditation we can relax our mind achieve the phase of REM while we are awake and dream of whatsoever we want in our life, we will get success in that Such is the power of our brain, which can create our own future. So relax, think positive, dream your future and get success in your life..

Rekha Joshi

Saturday, 9 August 2014

सभी भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

राखी का त्यौहार प्रेम पूर्वक मनाना है 
प्यारे इस बंधन को दिल से लगाना है 
अपनी प्यारी बहना की रक्षा खातिर 
भाई को राखी का ये क़र्ज़ भी चुकाना है 

सभी भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 

रेखा जोशी

Friday, 8 August 2014

वीर (आल्हा) छंद



लुटती इज़्ज़त माँ बहनो की ,रोती  है  बालायें  आज । 
 आज पुकारे  भारत माता ,लाल बचा लो मेरी लाज ॥ 

टूट गई  डोर विश्वास की ,मिट गया अब दीन ईमान । 
जननी कहे  आँसू बहाती   , माँ बाप का करो सम्मान ॥ 

रेखा जोशी 


हाइकु

हाइकु

जान से प्यारा
हिन्दुस्तान हमारा
विश्व से न्यारा
………………
जलता मन
सुलग रहा देश
आतंकवाद
………………
भटक रहा
दर दर ईमान
पाप फलता
……………

पराये यहाँ 
हम भारत वासी
देश अपना

रेखा जोशी 

मिटने लगी अब सीमायें भी विश्व की

देश औ विदेश अब रहे सिमट आजकल
विज्ञान से मिल रहा ज्ञान अमिट आजकल
मिटने लगी अब सीमायें भी विश्व की
दूरियाँ दिलों की भी रही मिट आजकल
रेखा जोशी

Thursday, 7 August 2014

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन

बँधी  है भावनायें
रेशम की डोर से
जिससे जुडा
रिश्ता भाई बहन के
स्नेह का
प्रेम और जज़्बात का
मान और सम्मान का
बहन की उम्मीदों का
भाई के फ़र्ज़ का
भावनाओं के
अनमोल रिश्ते से जुड़े
एक एक धागे में
लिपटी दुआएँ
प्यारी बहना की
अपने भैया के लिये
बांधा है धागो में
वचन बहना ने अपने
विशवास और सम्मान का
लिया रक्षा का वादा
प्यारे भैया से
उम्र भर के लिये

रेखा जोशी









In the lovely garden



There is
Shower of love
In the lovely garden
Of devotion
Shower of happiness
Now fills my mind  body and soul
In the lovely garden
Along with the pelting shower
Of rain
Peacock dances
In the lovely garden
Along with my mind body and soul

Rekha Joshi


गम यहाँ पर ज़िन्दगी में है बहुत



ज़िन्दगी  में और भी है  गम सनम 
दर्द  से   आँखे   हुई  है  नम  सनम 
गम  यहाँ  पर  ज़िन्दगी  में है बहुत 
है कभी ज़्यादा कभी  है  कम सनम 

रेखा जोशी 



Tuesday, 5 August 2014

अनकही कहानी पूरा होना चाह रही

साँसों की डोर से
बंधी
मेरी यह ज़िंदगी
है चलती जा रही

ज़िंदगी की धुन पर
थिरकती
मेरी सारी हसरतें
है गीत गा रही


वह इच्छाएँ
बरसों  से जिन्हे
था दबा रखा मैने
न जाने क्यों
मचल मचल कर सीने में
पूरा होना
है अब चाह रही

न जाने कब टूट जाये
यह साँसों की डोर
और
बिखर जाये सारे सुर
ज़िंदगी की धुन के
और
रह जायें यूँही
मेरी चाहते अधूरी
इससे पहले मेरी
अनकही कहानी
पूरा होना
है अब चाह रही

रेखा जोशी





रिमझिम बरसात की अब पड़ती फुहार


प्यार   की   अंगना   में  बरसती  फुहार
तन बदन  में खुशियाँ अब  भरती फुहार
फुहार   संग   बाग   में  नाच   रहे   मोर
रिमझिम बरसात  की अब पड़ती फुहार

रेखा जोशी

Monday, 4 August 2014

क्यों चिपके रहें गुज़रे वक्त की यादों में

वक्त तो गुज़र जाता है रुकता  फिर कहाँ
सिमट जाता है  सपनों में रहता फिर कहाँ
क्यों  चिपके  रहें  गुज़रे  वक्त की यादों में
गुज़रा वक्त तो बीत गया आता फिर कहाँ

रेखा जोशी

Wonderful and beautiful journey


Beautiful site
Of mountains
Catching them in my closed eyes
Along with clouds
Makes my body tingle
With the gust of cool breeze
Came down from 
The serene spot
On the beat of chuffing 
Of toy train
Ripping the wavy path
Of mountains
Through wild forests
Coming down and down
This wonderful and beautiful journey
Refreshes my memory
For ever and for ever

Rekha Joshi 






खूबसूरत नज़ारे संग संग बादलों के

छिपा कर अपनी पलकों में
खूबसूरत नज़ारे
संग संग बादलों के 
शीतल पवन के झोंकों से सिहरता
मेरा तन 
लौट कर आई मै
माथेरन पर्वत स्थल
से नीचे 
छोटी टोय रेलगाड़ी की
 छुक छुक ताल पर
चीरती हुई ऊँची नीची पहाड़ियाँ
घने जंगलों से नीचे
उतरती नेरल के
स्टेशन तक  
समा गया
यह खूबसूरत सफ़र
मेरी यादों में
सदा सदा के लिए 

रेखा जोशी 

हाइकु [रक्षाबंधन ]

 हाइकु [रक्षाबंधन ]

नेह बंधन
है बहना का प्यार
रक्षाबंधन

भाई बहना
मनभावन रिश्ता
सबसे प्यारा

प्यार का धागा
बचपन का साथ
अटूट रिश्ता

फ़र्ज़ निभाना
कलाई पर राखी
भूल न जाना


राखी के तार
मिलता उपहार
प्यारा त्यौहार

रेखा जोशी


Sunday, 3 August 2014

Fragnance in the garden of friendship never vanishes [HAPPY FRIENDSHIP DAY ]


Fragnance of friendship is no less than a relation
Fragnance in the garden of friendship never vanishes
If the friendship is true and everlasting then
This pure relation of love is precious and priceless

Rekha Joshi

HAPPY FRIENDSHIP DAY


खुश्बू  दोस्ती की किसी रिश्ते से कम नहीं होती
दोस्ती की बगिया में कभी सुगंध कम नही होती 
दोस्ती  हो अगर श्री कृष्ण  और सुदामा जैसी तो 
प्यार के पवित्र  रिश्ते की कोई कीमत नही होती 

रेखा जोशी 


Saturday, 2 August 2014

Before it slips from hands fulfill all your fancy wishes


Every moment is perished
After giving birth to a new moment
Unfortunate we are
Don't value
That golden moment
Waste it in vain
Life is so short
Will pass just like that
gradually
Many desires
remaining in our hearts
This moment
Wiiln'tcome again
Before it slips from  hands
Fulfill all your
Fancy wishes

Rekha Joshi




पूरी कर ले ख्वाहिशें अपनी

मरता है हर पल
दे कर जन्म इक नए पल को
बदकिस्मत है हम जो
नही जानते मोल
इस सुनहरे पल का
गवां  देते है इसे व्यर्थ ही
छोटी सी ज़िंदगानी
यूँ ही गुज़र जायेगी
रफ्ता रफ्ता
सीने में लिये
लाखों अरमान
नही हाथ आएगा
फिर यह पल
पूरी कर ले
ख्वाहिशें अपनी
गुज़रने से पहले
इसके

रेखा जोशी


अमृत जैसी मीठी तुम हो


गंगा सी  पावनी तुम हो
लहरों सी रवानी तुम हो
तुम में छुपी बहुमूल्य निधि
अमृत जैसी मीठी तुम हो

रेखा जोशी 

साथ रहना तुम कभी मत छोड़ना रखना पकड़



जब  सिमटते है उजाले रात का दामन पकड़
फिर सुबह लाती नई खुशियाँ यहाँ दामन पकड़
………………
देख तेरे नैन हम उसमे समा कर रह गये
बाँध कर तुमने हमें क्यों अब  रखा दामन पकड़
………………
तुम हमे क्यों कर सताते हो सदा यूँ ही सनम
छोड़ कर गर चल दिये आना  वहाँ  दामन पकड़
………………
रात के साये हमें रह रह डराते है सनम
साथ रहना तुम कभी मत छोड़ना दामन पकड़
…………… …
रात फिर से  डूब जाये गी अँधेरे में सनम
साथ जीवन में अँधेरों का मिला दामन पकड़

रेखा जोशी

सावन की भीगी रातों में ठंडी फुहार रुलाती है

सावन की भीगी रातों में ठंडी फुहार रुलाती है 
घनघोर घटा संग दामिनी गगन पर रास रचाती है 
छुप गया चंदा बदरा संग तारों की बारात लिये 
लगा कर अगन शीतल हवायें बिरहन को सताती है


रेखा जोशी

Friday, 1 August 2014

संस्कार [शीर्षक ]

संस्कार [शीर्षक ]

सुबह सुबह मीता ने अपने पति आलोक और बेटे बबलू के साथ मॉर्निंग वाक पर जाना शुरू कर दिया । हर बात पर बबलू को अपने पिता की नक़ल करते देख उसे बहुत ख़ुशी मिलती थी ,आलोक के साथ अपनी ख़ुशी बांटते हुए बोली ,''देखो अपना बबलू तो बिलकुल तुम्हारी तरह बन रहा है ,'' सुन कर नन्हा बबलू बोला ,हाँ माँ मे बड़े हो कर बिलकुल पापा की तरह ही बनु गा ,सुबह आफिस जाऊँ गा ,बाईक चलाऊँ गा और रात को पापा की तरह दो पैग पी कर आप से  से झगड़ा किया करूँ गा ।''उसकी बात सुन कर मीता और अलोक अवाक रह गए ।

रेखा जोशी